18 June
2015
16:05
-इंदु बाला
सिंह
तीस
वर्षीया पुत्री का शरीर जब निकला मोर्ग
से
तब ठंडा हो
गया
सुदूर राज्य
से आये पिता का शरीर
और
सहारा के लिये
थाम लिया उन्होंने अपने मित्र का हाथ ........
अपनी बिटिया
का सारा क्रिया कर्म निपटा कर निकल चले
वे उस शहर से
बिना शिकवा
शिकायत के
अपने दामाद से
कभी न लौटने
का निर्णय ले
थाम के
अपनी चार
वर्षीय नतिनी का हाथ ........
इकलौती सन्तान
की खुशी के लिये
उसके मनपसन्द
विजातीय जीवनसाथी संग धूमधाम से ब्याह किया था बिटिया का पिता ने ...
नाजों की पली
बिटिया ने स्वप्न में भी न सोंचा था होगा
कि
उठेगा उस पर
उसके पति बने प्रेमी का हाथ ........
पिटाई से हुयी
अवाक्
अच्छी खासी
कमाऊ पत्नी के दिल के दौरे ने छीन लिया
नन्ही बिटिया
से माँ की छाया
और पिता से
पुत्री सुख |
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