गुरुवार, 14 मई 2015

सूखी आंखें


14 May 2015
16:43
-इंदु बाला सिंह


कोंच कोंच कर रुलाया
समझाया
सबने
उसे .......
भली लगें अश्रुपूरित आंखें
पर
वह ढीठ थी
घूरती थी सबको
अपनी जलती आंखों से
न जाने कहां की आग लगी थी
उसके दिल में
कि
आंसू भाप बन उड़ जाते थे
उसकी आंखो तक पहुंचते ही
और
उसकी सूखी आंखें
रह रह कर उकसाती थीं सबको
उसे कोंचने को |

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