मंगलवार, 26 मई 2015

कैद कल के पल


26 May 2015
15:24


-इंदु बाला सिंह

खुबसूरत
कैद कल के पल
देख
जी लेते हैं हम आज
वर्ना
यह जीना भी क्या जीना है यारो
हो के कैद
अपने ही मन के किले में |

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