रविवार, 3 मई 2015

बेटी सम्मान तलाशती ही रह जाती है |


03 May 2015
22:13

-इंदु बाला सिंह

बेहतर है
हम बेटी को बेटी ही रहने दें
बेटा कह कर पुकारते हम जब उसे
वंचित रहजाती है वह
कितने ही मधुर पलों से |
आजीवन
बेटे सा श्रम करके भी वह
घर बाहर दोनों ही जगह
अपने लिये
सम्मान तलाशती ही रह जाती है |

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