03 May 2015
22:13
22:13
-इंदु बाला सिंह
बेहतर है
हम बेटी को बेटी ही रहने दें
बेटा कह कर पुकारते हम जब उसे
वंचित रहजाती है वह
कितने ही मधुर पलों से |
आजीवन
बेटे सा श्रम करके भी वह
घर बाहर दोनों ही जगह
अपने लिये
सम्मान तलाशती ही रह जाती है |
हम बेटी को बेटी ही रहने दें
बेटा कह कर पुकारते हम जब उसे
वंचित रहजाती है वह
कितने ही मधुर पलों से |
आजीवन
बेटे सा श्रम करके भी वह
घर बाहर दोनों ही जगह
अपने लिये
सम्मान तलाशती ही रह जाती है |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें