शनिवार, 9 मई 2015

तिलिस्मी दुनिया


09 May 2015
14:05

-इंदु बाला सिंह

अजब है दुनिया
गजब हैं इसका रूप
अबूझ सी पहेली है यह
मीलों चले हम
पर
यूं लगे
हम खड़े हैं जहां के तहां
कितनी रहस्यमयी है यह दुनिया
इसका तिलिस्म न टूटे |

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