रविवार, 24 मई 2015

कृष्ण में पुत्र का रूप देखे वह


25 May 2015
04:29


-इंदु बाला सिंह


रात के अंधियारे में
गूंजती थी
उसकी
कभी कभी गीत की पंक्तियां .....
राधा क्यूं गोरी मैं क्यूं काला ........
कृष्ण के बालरूप में
वह माँ याद करती थी
अपने उस धनी पुत्र को
जो
सपरिवार जा बसा था विदेश
और
जिसकी स्वार्थपरता पर
शिकायत के दो बोल भी न फूटते उस अकेली माँ के मुंह से
यह
उसका छिना पुत्र प्रेम था
या
समाजिक मान की तलाश थी ?
न जाने की था
पर
जो भी था
यह एक अवहेलित पैसोंवाली माँ का रुदन गीत जरूर था
और
रात में मेरी नींद टूट जाती थी
सुन कर वह गीत  .......
आखिर डट के क्यों न कोसती थी वह औरत
अपने पुत्र को
जो 
अपने पिता पिंडदान से निपट चूका था |





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