लोक त्यौहार पल भर को भुला देतें हैं दुःख ....
त्यौहार आम आदमी का सकून है
भूल जाता है वह
विस्थापन
जीवन के दैनिक कष्ट
भविष्य के सपने
बस वह वर्तमान में जीने लगता है
बस इस वक्त वह है और उसकी जीवन दायिनी प्रकृति
कल की कल सोंचेगा वह |
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