मंगलवार, 19 नवंबर 2013

मेरा रहस्य

1971


मैं कौन हूँ
तुम नहीं पहचानते मुझे !
तुम्हारा ही तो प्रतिविम्ब हूँ मैं
आओ
झांको मेरी आँखों में
पहचानो
मेरी परतें उघाड़ो
नवीं रूप !
मेरी चीड - फाड़ करो
मुझे समझो !
.......................
............................
नहीं पहचाने !
मैं प्रकृति हूं
मैं कविता हूं
मैं नारी हूं
तुम अपने और मेरे बीच के धुंध को
चीर नहीं सकते क्या !

         

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