आसान होता है
जी लेना
हंस लेना रो
लेना
मार खा लेना
दोष दे देना
दैव को
लड़की के लिए
पर
वह कैसी जननी बन रही हैं !
कैसे
नागरिक बना रहे हैं अपनी औलाद को पुरुष आज !
माता पिता की
गुमी आवाज होती है संतान
परिवर्तन तो
लाना ही होगा
भाग्य की
औलाद न बन के
अब तो पुरुषार्थ करना ही होगा
युवक व
युवतियों को
नाकामियों व
गरीबी की वसीयत को ठुकराना ही होगा
छल का जवाब
कर्म से देना होगा |
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