गुरुवार, 7 नवंबर 2013

पुरुषार्थ तो करना होगा

आसान होता है जी लेना
हंस लेना रो लेना
मार खा लेना
दोष दे देना दैव को
लड़की के लिए
पर वह  कैसी जननी बन रही हैं !
कैसे नागरिक बना रहे हैं अपनी औलाद को पुरुष आज !
माता पिता की गुमी आवाज होती  है संतान
परिवर्तन तो लाना ही होगा
भाग्य की औलाद न बन के
अब  तो पुरुषार्थ करना  ही होगा
युवक व युवतियों को
नाकामियों व गरीबी की वसीयत को ठुकराना ही होगा
छल का जवाब कर्म से देना होगा |

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