शहर में
भिखारी के जत्थे
हर शनिवार को
आते हैं
फिर दिखाई
नहीं देते
हर गली के दो
तीन घरों के सामने
चावल का
बर्तन थामे एक महिला मिलती है
जो एक एक मुठ्ठी
चावल बांटती है
हर भिखारी को
और मुक्त
करती है अपने परिवार को
शनि के प्रकोप से
बड़े कीमती हैं
ये भिखारी
हमें शनि के
कोप से मुक्त करते हैं
सरकार को इनका
विशेष ख्याल रखना चाहिए
कहीं इनकी
जाति लुप्त न हो जाय |
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