मंगलवार, 19 नवंबर 2013

भिखारी जरूरी हैं

शहर में भिखारी के जत्थे
हर शनिवार को आते हैं
फिर दिखाई नहीं देते
हर गली के दो तीन घरों के सामने
चावल का बर्तन थामे एक महिला मिलती है
जो एक एक मुठ्ठी चावल बांटती है
हर भिखारी को
और मुक्त करती है अपने परिवार को
शनि के प्रकोप से
बड़े कीमती हैं ये भिखारी
हमें शनि के कोप से मुक्त करते हैं
सरकार को इनका विशेष ख्याल रखना चाहिए
कहीं इनकी जाति लुप्त न हो जाय |

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