बुधवार, 20 नवंबर 2013

औरत का मन

इर्द गिर्द देखती हूं
शिकायतें करती हैं महिलाएं
अपने पुरुष नजदीकी रिश्तेदारों से
और जगह बनाती हैं अपनी उनके दिल में
वह पुरुष अपना पुत्र ही क्यों न हो
वैसे दुनियां में दो जातियां है - मर्द और औरत
बाकी तो सब नकली हैं
मर्द को स्त्री बड़ा मानती है 
कितना आसान  होता है जीना
शिकायतें करते हुए
हंसते खिलखिलाते
बच्चे जन्मा कर उन्हें पालते
और खाना बनाते बनाते काट  लेना जीवन
घर की चाहरदीवारी में सुरक्षित
हर लड़की के सामने उसका आदर्श  हैं
अपने घर और अड़ोस - पड़ोस की सजी धजी बरामदे में बतियाती औरतें
आफिसों में तो जरुरतमन्द औरतें काम करती हैं
वरना अपना घर किसे बुरा लगता है
औरत का मन तो बंजर मैदान होता है
जो पुरुष उसे जीत ले
वह उस मैदान का अधिकारी होता है |

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