मकान जरूरी
है
ब्याह कैसे
होगा लड़के का
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कोई बात नहीं
हम अपनी लड़की
के नाम से खरीद देंगे एक घर
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सरकारी नौकरी
में है लड़का
सरकारी
क्वाटर तो मिलेगा न
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तो
क्या परिवार भी भटकेगा शहर शहर , गांव
गांव
बच्चों की
पढाई कैसे होगी
कितने समझदार
हैं माता पिता
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लड़की आज सपना
देखती है
अपना मकान
बनाने का
आखिर कौन सा
मकान उसका है ?
एक पति का है
तो दूसरा पिता का
ब्याह कर लेगी
तो तनख्वाह का हिसाब पति रखेगा
बच्चे कौन
सम्हालेगा ?
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इस मकान के
झगड़े में घर खो गया
ननद भाभी ,
ससुर समधी , सास समधिन
चाचा मामा ,
चाची मामी .....सब गुम गये
सब रिश्ते
कहानी के पात्र बन गये
जब एक छोटे
मकान में बसता था घर
चूल्हे अलग थे
पर साँझा था
सुख दुःख तीज त्यौहार
.......................
हम प्रगति कर
रहे हैं
मकान बना रहे
हैं |
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