मंगलवार, 5 नवंबर 2013

मकान तो जरूरी है

मकान जरूरी है
ब्याह कैसे होगा लड़के का
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कोई बात नहीं
हम अपनी लड़की के नाम से खरीद देंगे एक घर
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सरकारी नौकरी में है लड़का
सरकारी क्वाटर  तो मिलेगा न
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तो क्या परिवार भी भटकेगा शहर शहर , गांव गांव
बच्चों की पढाई कैसे होगी
कितने समझदार हैं माता पिता
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लड़की आज सपना देखती है
अपना मकान बनाने का
आखिर कौन सा मकान उसका है ?
एक पति का है तो दूसरा पिता का
ब्याह कर लेगी तो तनख्वाह का हिसाब पति रखेगा
बच्चे कौन सम्हालेगा ?
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इस मकान के झगड़े में घर खो गया
ननद भाभी , ससुर समधी , सास समधिन
चाचा मामा , चाची मामी .....सब गुम गये 
सब रिश्ते कहानी के पात्र बन गये
जब एक छोटे मकान में बसता था घर
चूल्हे अलग थे
पर साँझा था सुख दुःख तीज त्यौहार
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हम प्रगति कर रहे हैं
मकान बना रहे हैं |


  



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