गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

एक उलाहना




-इंदु बाला सिंह

तुम तो  बैठे मंदिर में
न समझो तुम सच की आंच
लोग कहें - ' मन में भगवन '
तो
क्यों मरता है मन
अब न फुसला सको तुम ....
मैं भी खूब समझूं
तुम बसते राजनीतिज्ञों के घर......
जाओ जाओ
वहीं रहो
मैंने
बंद कर दिये
अपने दरवाजे
तेरे लिये ।


1 टिप्पणी:


  1. भाते तुम्हें राजनीतिज्ञ


    - इंदु बाला सिंह


    सती मैय्या !
    तुम पूजनीय थी
    पर
    न जाने किसने तुम्हारा नाम बदला
    तुम रानी सती कहलायी
    फिर
    दादी कहलायी
    फिर भी
    भाते तुम्हें राजनीतिज्ञ
    ऐसा क्यों........
    ऐसा क्यों ।

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