गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

नया साल आया था



- इंदु बाला सिंह


कल रात आया था
नया साल
मेरे पड़ोस के बनते मकान में
और
रात भर धूम मचायी  थी उसने
मजदूर के घर में
देर शाम तक आती रही
हीटर पर बनते खाने की खुशबू
और
रात भर
रेडियो से गानों की आवाज    ...........
सुबह होते ही  चला  गया था
नया साल ..........
रोज की तरह
आज सुबह भी मजदूरों की भीड़ जुट गई
और
बेलचा चलाने लगी  । 

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