-इंदु बाला सिंह
टिमटिम चमकते तारे
मन को भाते
बादलों के
टुकड़ों के पीछे
छुप जाते
खेलते
लुक्काछिप्पी मुझसे ...........
खोजूं हो परेशान
मैं उन्हें
देख मुझे परेशान
झलक दिखलाते वे अपनी
फिर छुप जाते ...........
ओ तारे !
क्यों छुपते तुम
रात भर क्यों न चमकते तुम
सुकून देता
मुझे
तुम्हारा झांकना
मेरे झरोखे से ।
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