शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015

महत्वाकांक्षी औरत




- इंदु बाला सिंह



हर भोर शुरू  करती है
तोड़ना
महत्वाकांक्षी औरत
अपना पथरीला नसीब
कभी रंगों से
तो
कभी  शब्दों से .........
अकेली ही चलती है
वह
अपने  अंधियारे में
दृढ निश्चय  की मशाल थामे
जीवन पथ पर
इस आस में
कि
कभी तो मिलेगा
मीठा झरना
अधिकारयुक्त   .... गरिमामयी
रंगीन सांझ का । 

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