09 July 2015
07:26
07:26
-इंदु बाला सिंह
बाँध
पीठ पर पुत्र और पुत्रियां
वह
निकल पड़ी थी एक दिन ...............
और
भीड़ गयी थी
वह समय से लक्ष्मीबाई सरीखी
थाम
हाथ में हथियार
चली
करने साबित कलम की शक्ति
वह अद्भुत सेनानी ............
और
भिड़ंत हुयी
उसकी
अपनों से ...........
परायों से .............
समस्या के बादलों में
खामोश चमक बरस जाती थी
वह अद्भुत सेनानी सब अवरोधक पर ..........
देखते ही रह जाते थे
हो मौन
निकटस्थ उसे
अपने ड्राइंग रूम के झरोखे से ........
माना
एक दिन जीत लिया उसने
खेती लायक क्षेत्र
पर
एक शाम
अनुभव हुआ उसे ............
सेनानी तो आजीवन सेनानी रहता है
और
तब से वह
सदा दौरा करती रहती है
अपने इलाकों का |
पीठ पर पुत्र और पुत्रियां
वह
निकल पड़ी थी एक दिन ...............
और
भीड़ गयी थी
वह समय से लक्ष्मीबाई सरीखी
थाम
हाथ में हथियार
चली
करने साबित कलम की शक्ति
वह अद्भुत सेनानी ............
और
भिड़ंत हुयी
उसकी
अपनों से ...........
परायों से .............
समस्या के बादलों में
खामोश चमक बरस जाती थी
वह अद्भुत सेनानी सब अवरोधक पर ..........
देखते ही रह जाते थे
हो मौन
निकटस्थ उसे
अपने ड्राइंग रूम के झरोखे से ........
माना
एक दिन जीत लिया उसने
खेती लायक क्षेत्र
पर
एक शाम
अनुभव हुआ उसे ............
सेनानी तो आजीवन सेनानी रहता है
और
तब से वह
सदा दौरा करती रहती है
अपने इलाकों का |
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