सोमवार, 20 जुलाई 2015

निरुद्देश्य भटकन


21 July 2015
10:47

-इंदु बाला सिंह

मन
क्या तू
उर्वर हो रहा है !
बंजर हो रहा है !
या
धरती पर
ऋतू परिवर्तन हो रहा है
यूँ लगता है
जा रही हूं निरुद्देश्य ........
कभी कभी
भटकन सी महसूस होने लगती है
न जाने क्यूं |


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