21 July
2015
10:47
-इंदु बाला
सिंह
मन
क्या तू
उर्वर
हो रहा है !
बंजर हो रहा
है !
या
धरती पर
ऋतू परिवर्तन
हो रहा है
यूँ लगता है
जा
रही हूं निरुद्देश्य ........
कभी कभी
भटकन सी
महसूस होने लगती है
न
जाने क्यूं |
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