06 July
2015
11:47
-इंदु बाला
सिंह
काश
!
वह चिड़िया
होती !
पेड़ पर घोंसला
बनाती चिड़िया को देख
सोंचा
उसने ........
पर
उसे तो
अपना मकान
बनाना किसीने सिखाया ही नहीं
बस
एक मकान से
उठा कर
बैठा दिया
किसी दुसरे मकान में .............
आजीवन वह
अहसानमंद रही
अपने
मकानमालिक का
बारम्बार जीती
रही मरती रही वह
दुसरे के मकान
में
अपमानित हो
कर भी ........
शायद यही उसके
दैव को मंजूर था
वह मानवी थी न
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