09 July
2015
11:11
-इंदु बाला
सिंह
अंतर्मन
चटकता नहीं है ......
गल जाता है
पढ़ विभाजन की
कहानियां
परिवार का
विभाजन हो
या
सम्बन्धों का
विभाजन
अलगाव
तो अलगाव ही
है
विश्व बंधुत्व
कहाँ छुपा है
किशोर मन है
सोंचता ................
क्या हम
स्वार्थी नहीं बन रहे !
दोषारोपण से
मेरा दोष कम
नहीं होता .............
जुड़ाव में
है सकारत्मक
शक्ति
और
अलगाव में है
नकारात्मक शक्ति
शक्ति तो
दोनों प्रक्रिया दे ..............
स्वार्थ की
नकारात्मक
गर्मी .......
घाव .......
दे हमें
कैंसर
तो क्यों न हम
खुद का तन शीतल करें
ज्ञान की शीतल
हवा से |
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