03
February 2015
07:47
-इंदु बाला
सिंह
यज्ञ
कुण्ड में कूदती रहेंगी बेटियां
नष्ट होती
रहेंगी मर्यादायें
ओ पिताश्री !
आखिर कब तक ?
आखिर कब
बनाओगे
तुम
बेटियों को
योद्धा
आखिर कब
सिखाओगे उसे बाधा दौड़
आखिर कब बंद
करोगे तुम कतरना उसके पर |
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