02
February 2015
17:53
02 February 2015
09:02
-इंदु बाला सिंह
पढ़ी लिखी महिला हो या काम वाली हो
जब भी मिल के बैठती हैं
तब रसभरी चर्चा होती है ........
बेटी तो अमानत है
दुसरे की
आज नहीं तो कल देंगे ही उसे
जिसके लिये जन्मी है वह
सुनती हूं तो लगता है
कैसे सुधरेगी स्थिति लड़की की
कब तक पैदा करती रहेगी महिला और पुरुष पोसता रहेगा दुसरे की अमानत
उपहार के साथ देने की चाह संग जीयेगी महिला
अपनी जन्मायी बेटी को
किसी दुसरे को |
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