बुधवार, 28 मार्च 2012

ये कैसी नींव ?


बेटी की कमाई खाओगे क्या ?
अरे लगा दिया है नौकरी पर
अपने शादी का पैसा तो जुटा लेगी |
शर्म आती है
बेटी के बाप की मजबूरी पर
पुत्र और उसके पिता की बेहयाई पर |
विवाह तो स्वस्थ समाज की  नींव है
पत्नी धन से बसा घर
क्या सुख देगा |
बिना परिश्रम का मिला धन
सुविधाभोगी बनाता है
पैदा करता है वृद्धाश्रम |
बच्चे ही समाज का बीज हैं
क्या बो रहे हैं हम उनमें
हम कहाँ जा रहे हैं ?

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