मंगलवार, 27 मार्च 2012

इस्पाती मानव


स्पात नगरी में
इस्पात बनना चाहेंगे
तो भी बन जायेंगे |
फौलादी मन है
तन भले हो
चलते चले जायेंगे ए इच्छित भविष्य की ओर |
एक निश्चित सांचे में ढले मन को 
पिघलाने की गर्मी ढूंढना कठिन है
हाँ तोड़ना है तो तोड़ दीजिए |
अरे ! छोड़ भी दीजिए
वह अपनी रोबोटिक दुनिया में
मस्त है ,व्यस्त है ,अपने में डूबा |
जाने से पहले
कुछ दे कर ही जायेगा
ले कर नहीं |
आपको लूटने को
उसीका घर मिला ..
आप कुछ काम क्यूँ नहीं करते ?
बिना श्रम के
जल्दी ही सुख पाना चाहते हैं
आप अपना गांव छोड़ इसी लिए आये हैं |
क्यूँ गांव को बदनाम करना चाहते हैं
यहाँ लोग लोग चुपचाप जीते हैं
अपने में डूबे |
यहाँ रिश्ते नहीं रहते
पति पत्नी और बच्चे रहते हैं
या फिर मात्र पति पत्नी |
खुश हैं
खुश रहने दो इन्हें
तुम भी खुश रहो |







  

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