शुक्रवार, 16 मार्च 2012

तू

१९७६

खोजा तुझको व्यर्थ ही
मंदिर ,मस्जिद .गिरिजा में
मिल गया तू
विज्ञान की हार में
अदृश्य और अप्राप्य में |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें