हर वर्ष नवरात्रि में अष्टमी के दिन
कमजोर वर्ग की लड़कियों की खुलती है किस्मत
कितनो के घर भोजन करें वे
पेट तो एक ही है न
पर मिले उपहार ला देता है चमक
उनकी आँखों में |
यही वे लड़कियां हैं
जो चमकाती हैं आपका घर
इस्त्री करती हैं आपके कपड़े
बेचती हैं आपको सब्जी
खिलाती हैं आपको गरम रोटियां
और भेजती हैं अपने भाई को विद्यालय |
ये आपको सकूं देनेवाली
लड़कियां न होतीं तो क्या होता क्यूं कि
स्वस्थ लड़कियां चमका देती हैं आँखों को
ये हमारे घर अच्छा काम करेगी
काम न मिलने पर चली जाती हैं
दूसरे राज्यों में माता पिता की गरीबी दूर करने |
ये पुरुषों की तरह गांव में एक
शहर में एक नहीं रखतीं
मौन बस आपके घर को ही अपना घर मान
लुटाती हैं प्यार
बूढ़ी हो जाती हैं
मात्र प्यार भरे संबोधन मौसी का पाते पाते |
यह ऐसा मजबूरी में बना सम्बन्ध
बसाता है बहुतों का घर
क्या होता अगर न पैदा होती ये लड़कियां
माता पिता की प्यारी ये जानें
हमारे पास नहीं है इस समस्या का हल
' जस की तस धर दीनी चदरिया ' बस |