सोमवार, 27 अगस्त 2012

तांका - 4


मौसमी वर्षा
नहीं हूँ मित्र मेरे
पवन हूँ मैं
संग हूँ साथ तेरे
कहाँ ढूंढे तू मुझे |

ढूंढे जो साथी
जन्मदाता में निज
नहीं भटके
उसका मन कभी
क्या ढूंढे युवा !

हो जा आज तू
मन पर सवार
थाम चाबुक
उड़ ले बेखटक
आसमान साफ है |

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