रविवार, 26 अगस्त 2012

हाइकू - 23


संस्मरण तो
भोगी हुई बूंदें हैं
निज श्रम की |

रह वहाँ पे
जहां तेरा मूल्य हो
निकल चल |

है हर व्यक्ति
निज भाग्यविधाता
न कर आस |

कल की छोड़
उड़ी मैं तो जी भर
आने दो अरि |

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