मंगलवार, 28 अगस्त 2012

हाइकू - 25


दुखी क्यों ! उठ
खड़ी हो दहाड़ तू
जग डरेगा |

निगल चली
मैं कड़वी भेषज 
अपमान की |

कोई दान
श्रमदान से बड़ा
रख याद तू |


मशाल बनी
वो तो सारा जीवन 
संतति हेतु |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें