एक प्रश्न
मूलभूत सुविधा के अभाव में
कितने दिनों तक
मनुष्य
सजीव रख पायेगा
अपनी
नैतिकता ?
झकझोरता है
एक प्रश्न
अस्तित्व
को !
आखिर
दोष
किसका ?
जी ही लें
चार दिन की जिंदगी
इतने झमेले
चलो जी ही लें
कुछ पल
सत्य न सही
स्वप्न ही देख लें
जो दिखाते हैं
हमें
हमारे नेता |
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