गुरुवार, 16 अगस्त 2012

छोटी कवितायेँ - 2


 एक प्रश्न
 
मूलभूत सुविधा के अभाव में
कितने दिनों तक
मनुष्य सजीव रख पायेगा
अपनी नैतिकता ?
झकझोरता है
एक प्रश्न
अस्तित्व को !
आखिर
दोष
किसका ?


  जी ही लें

चार दिन की जिंदगी
इतने झमेले
चलो जी ही लें
कुछ पल
सत्य सही
स्वप्न ही देख लें
जो दिखाते हैं
हमें
हमारे नेता |

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