मंगलवार, 14 अगस्त 2012

क्षणिकाएं - 3


सन्नाटा
जब करे भांय भांय
यूँ लगे
जमीन तैयार हो रही है
सृजन की
शायद यादों के बीज पड़ेंगे
और कल्पवृक्ष लगेगा
सांस रुकी हुई है
उस वृक्ष की शोभा देखने को |


सुरक्षा करते करते
सरहद कब नींव बन गयी
पता ही चला उसे
आज हैरान है वो
खुद पर
और अपने स्थान पर |

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