स्वयं को पहचानिये
परहित कार्य कीजिये |
सर्वप्रिय कहलायिये
दूसरों को न देखिये |
अपना कार्य कीजिये
फौलाद बन जाईये |
कर्म ही पहचान है
शान है आपकी यहाँ |
बस चलते जाईये
नए कर्म तलाशिये |
कर्महीन गिर गया
सबकी निगाह से ही |
आप मरे उसी पल
जब निकम्मे बने |
उठिए साँस लीजये
क्यूँ आसरा देखते |
चलनेवाला ही प्यारा
रुका बस गया पूजा |
पूजनीय बने तो क्या
जहाँ स्व ही मृत है |
भले डगमगायिये
अपनी पहचान बने |
और आपको तलाशे
कुछ ऐसा करें अब |
कोई नहीं है आपका
आप अपने हैं साथी |
शान करें खुद पर
जन्मे इस धरा पर |
देख आपकी खुद्दारी
लोग कसमसायेंगे |
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