मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

अप्रत्याशित बारिश


इस तपते मौसम में
हल्की आंधी के साथ आती
बारिश की बूंदों नें
तन शीतल किया
और मिट्टी की सोंधी महक से
मन पिघलने लगा |
जल्दी जाय
यह अप्रत्याशित आगमन
बारिश का
और गडगडाहट बादलों की
नहीं तो सब पिघल जायेगी 
इतने प्यार से संजोयी निस्पृहता |
कामनारहित हो संसार में
दूसरे के दुख में दुखी
और सुख में सुखी
दूसरों को पहचानने में लगा मन
दिन में ही
लगेगा भटकने |

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