बुधवार, 9 अक्टूबर 2024

प्रश्न करो

#part_2_poem




#इन्दु_बाला_सिंह


कब तक और कितनी औरतें मौन रहेंगी 


परिवार की सुख सुविधा के लिये मिटती जातीं हैं 


एक पीढ़ी के पीछे दूसरी पीढ़ी संस्कार के नाम पर 


रिश्तों की तंग गलियों में घुटती हैं 


कभी सुरक्षा के नाम पर मौन की जातीं हैं 


तो कभी परिवार की इज्जत के नाम पे 


पिता हक़ दो बेटी का 


बेटी को शक्ति दो 


उसे प्रश्न पूछने लायक़ बनाओ 


जिससे वह आजीवन 


सवाल करना न छोड़े


ओ औरत !


तुम्हारे सवाल तुम्हारी आजादी की नींव हैं 


तुम अपने सामनेवाले को आईना दिखा सकती हो 


देश आज़ाद सवालों से हुआ 


अपने हक़ के लिये सभी प्रश्न उठाये और लड़े 


लड़ो लड़कियों लड़ो 


ओरतो लड़ो 


अपनी अस्मिता के लिये नागरिक अधिकार के लिये लड़ो ।


09/10/24



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें