#इन्दु_बाला_सिंह
पेशाबदानी दे दे बेटा
नंग धड़धड़ंग पिता ने मनुहार की थी
नहीं तो पेशाब बिस्तर पर हो जायेगा
आ कर तुम्हारा भाई ग़ुस्सा करेगा
पीठ में घाव था
शरीर असक्त था
वे उठ नहीं पा रहे थे
बेटी माँ बन गयी थी इस पल
पर
बेटा पिता नहीं बन पाया था
बेटी ने पेशबदानी पिता को पकड़ा दी
रात भर सोते नहीं थे पिता
चादर को चुन्नट करते रहते थे
बेटी दुःखी रहती थी
अपने आजीवन सहारा रहे पिता के अंतिम महीनों की असहायता देख कर
वह तो स्वयं पिता पर मानसिक तौर पर निर्भर थी
राशन मँगवाना से ले कर
बिजली बिल भरवाना
होल्डिंग टैक्स देना
बिस्तर पर लेटे पिता
अपनी आँखों के सामने करवाते थे पिता
उस दिन बेटे को चिंघाड़ कर आवाज़ लगाये पिता अस्पताल के बेड पर
बेटा पास न था
पास में था केवल अटेंडेंट
एक हिचकी आई
खून का थक्का निकला
और प्राण भी निकला ।
18/10/24
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