सोमवार, 14 अक्टूबर 2024

अजीब माँ



#इन्दु_बाला_सिंह


ग़ज़ब की माँ थी वह 


उसके अंदर लाड़ , स्नेह नहीं था 


वह 


ख़ूँख़ार थी


कठोर थी 


अपने बच्चों के लिये वह सुरक्षा घेरा थी 


उसने 


कभी नहीं निकलने दिया उस घेरा के बाहर 


अपनी औलादों को


उन्हें बाहर की कहानियाँ भी न सुनाई 


वह नहीं चाहती थी 


बाहर की  वीभत्स सच्चाई से परिचित हों इसके बच्चे


बचपन की मासूमियत खोने से  सपने टूट जाते हैं  


बच्चे बड़े हुये


और नाखुश हुये अपनी माँ से 


सब की माँ 


करुणा की सागर थी 


स्नेहिल थी 


अजीब औरत थी उनकी माँ  ।


13/10/24



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