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मंगलवार, 22 मार्च 2016
कब तक जलती रहोगी तुम
- इंदु बाला सिंह
कब तक बैठती रहेंगी होलिकायें आग में
गोद में ले प्रह्लाद को .....
जीतीं हैं ........
मिटती हैं घरों में
आज भी ..... होलिकायें ।
...........
.........
ओ होलिका !
आखिर कब तक जलोगी तुम
क्या यूँ ही मिटती रहोगी सालों साल |
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