- इंदु बाला सिंह
जलाने में आता है कितना आनद
जरा बच्चे से पूछो न
माचिस की डिबिया मिली नहीं कि एक एक तीली जला के पाता है वह आनद ......
फिर
जलाता है वह कूड़ा
जलती आग
समाप्त करती है उसका भय आग से .........
आनंद आने लगता है उसे
जलाने में
जो न मन भाया ......
जिस पर क्रोध आया
जला दिया
सबूत भी मिट गया .......
कितना सुख मिलता है हमें ........ अनचाही वस्तु जलाने में ।
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