- इंदु बाला सिंह
ब्याहता बेटी का ...... न कोई मां ....... ना बाप .........
स्वार्थ का सब संसारा
मोह धागे में बंधा मन ...... भागे ... आशा संग .......
तृषित आँखे ..... खोजें .....
पार्क के दौड़ते बच्चों में ....... बचपन ...... खोया अपनापन ।
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