मंगलवार, 8 मई 2012

मौन भ्रूण


सब कुछ है
नियोजित इस घर में
तेरी एक बहन आ चुकी  है
मेरे पास |
मैं नहीं ला सकती
इस दुनियां में तुझे
जाना ही होगा तुझे मेरी कोख से
या
बोल 
क्या मैं भी जाऊं बाहर तेरे साथ घर से |
जरुरत है 
एक अदद बेटे की
इस घर को
अगर कभी वह आया
तो उसे बेटे बेटी में फर्क माननेवाला बनाउंगी मैं |
बिटिया मेरी !
तू ही बता मैं क्या करूं ?
यह तो इतिहास गवाह है
आजादी  शहीद की नींव पर खड़ी होती है |
क्यों बताया चिकित्सक नें
तेरे अस्तित्व को ?
नहीं तो ही जाती तू
मेरी दुनियां में |
कल चली जायेगी
मेरी कोख से तू
मैं स्वगत कथन करूंगी
प्रतिदिन अकेले में |
तू भी कुछ बोल
चुप क्यों है ?
तुझे न भूलूंगी कभी मैं 
तूझे जन्म न दे पाने की दोषी हूँ 
मैं भी |

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