शुक्रवार, 25 मई 2012

हायकू - 10


सन्नाटा आज
मुखरित हो उठा
बहा निस्पंद |

तू ढूंढ प्यार
अपनापन सदा
अपनों में ही |

रुदन तेरा
मिटा देगा महल
मुस्कुरा जरा |

आशाएं जन्मीं 
पल्लवित हुई  हैं 
महलों में ही |

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