गुरुवार, 3 मई 2012

हायकू - 2


रोती सूरत
भाये कुछ लोगों को
महिलाओं की |

भोर गर्मी की
अनुशाषित करे
हम युवा को |

नारी से घर
समाज की रीढ़ वो
भूल कभी |

माता पिता हैं
बरगद की छाँव
याद रख तू |

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