शनिवार, 26 मई 2012

हायकू - 11


तेरी हार में
है किसी का आनन्द
किसी की जीत |

योगी का मन
कर्मक्षेत्र में लीन
कब भटके !

जग रुके
निज भी तड़पे
निज के लिये |

डिग्रियां खोंस
फूलों संग बालों में
इठलाई वो |

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