शनिवार, 26 मई 2012

हायकू - 12


तेरी जीत पे
ज्यों ही कूकी कोयल  
मैं नाच उठी |

ली ईश से
जब मैं अहसान
तुझसे क्यों लूँ |

छूने को चन्द्र
है सागर विह्वल
उड़े मन भी |

सांवली रात
मन की पीड़ा हरे
चित्त हो शांत |

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