- इंदु बाला सिंह
याद है आज भी
दस वर्षीय
भयभीत सी अचम्भे से फ़ैली आँखों से दीखता दूर दूर तक का अँधियारा
जब उतरी थी
मैं रात के अंधियारे में
पिता के संग
राउरकेला के स्टेशन पर
और
रिक्शे में बैठ इस्पात एम्प्लॉयीज कॉलोनी को जाते हुये
सड़क पर जलते बल्ब
दूर दूर तक फैला अँधियारा
और
पहाड़ बगल से गुजरना ..........
रोमांचित कर जाता है
भुलाये नहीं भूलता
काफी समय रिक्शा चलने के बाद
जगर मगर करती कालोनी भय मिटा दी थी ...........
पिता को नौकरी लगी थी ......... स्टील प्लांट बस रहा था ।
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