मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

सूखी रोटियां



- इंदु बाला सिंह


हाय रे ! नौकरी
तूने याद दिला दी बचपन की सूखी रोटियां
मैं लाख भूलना चाहूं
पर
अकेले में मुझे सुस्ताते देख
चुपके से नजानें क्यों लुढ़कती हुयी आ जातीं हैं जेहन में
माँ के हाथ की सूखी रोटियां |

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