गुरुवार, 19 मई 2016

होनी



-इंदु बाला सिंह

होनी !
गर तुम्हारा  गरूर बढ़ गया है
और तुम पर्वत बन आ खड़ी हो  मेरी राह में
तो मेरे हाथ में भी छेनी और हथौड़ा है .......
मुझे राह बनाना आता है । 

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