शनिवार, 21 मई 2016

गुम जाती है लड़की




-इंदु बाला सिंह




सुनसान बालकनी में
आ खड़ी होती है कभी कभी एक सात वर्षीय लड़की
और वह मुझे खींच ले जाती है मुझे मेरे गांव में
दिखाती   है मुझे पोखरी ........ खेत ...... मेरी अपनी बखरी   ....स्टेशन से गांव तक पहुंचने के ऊबड़ खाबड़ रास्ते   ......
फिर दिखलाती है वह मुझे मेरे पिता के हाथों में लटकती अमीरती भरी हांडी  .........
फिर ......वह लड़की कहीं गुम  जाती है । 

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