04 May 2016
17:58
17:58
-इंदु बाला सिंह
हैरान हूं मैं आज ......अपनी सोंच पे
आखिर क्यों तलाशती रही .... आस करती रही मैं सुकून के लिये
कोई एक मित्र कंधा ......
कैसे मैं भूल गयी थी कि कंधा तो लोग शव को देते हैं .......
फिलहाल मुझे शव बनने की कोई चाह नहीं |
आखिर क्यों तलाशती रही .... आस करती रही मैं सुकून के लिये
कोई एक मित्र कंधा ......
कैसे मैं भूल गयी थी कि कंधा तो लोग शव को देते हैं .......
फिलहाल मुझे शव बनने की कोई चाह नहीं |
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