रविवार, 22 मई 2016

मैं न पहचानूं तुम्हें



- इंदु बाला सिंह

जिंदगी ने सिखाया जीना
समझौते करना
अकेले में दो घूंट रम पीना
अपनी मौज में रहना  .....
तुम कौन हो ?
मैं न पहचानूं तुम्हें
और क्यों डालूं जोर  ....... अपने दिमाग पे
पहचानने के लिये ........ तुम्हें । 

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