My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी,
कहानियों का पेड़,
ek chouthayee akash,
बोलते चित्र,
Beyond Clouds,
Sansmaran,
Indu's World.
रविवार, 22 मई 2016
मैं न पहचानूं तुम्हें
- इंदु बाला सिंह
जिंदगी ने सिखाया जीना
समझौते करना
अकेले में दो घूंट रम पीना
अपनी मौज में रहना .....
तुम कौन हो ?
मैं न पहचानूं तुम्हें
और क्यों डालूं जोर ....... अपने दिमाग पे
पहचानने के लिये ........ तुम्हें ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें